सुमिरन करिकै महादेव का
करिकै गौरी माँ को ध्यान।
एक मिचकुरी इक बुढ़ऊ का
किस्सा सुन्दर करौं बखान।
बुढ़ऊ जात रहैं रस्ता माँ
एक मिचकुरी परी देखाय।
बोली मोहिंका चूमि लेव तो
मैं बनि जाउँ सुन्दरी नारि।
तब हम तुम्हरी तिरिया बनिकै
सगरो बुढ़ापा देहुँ निकारि।
सेज बिछाकै तुमका प्यारे
कामकला ते देहुँ रिझाय।
एतना सुनिकै तब बुढ़ऊ ने
ओहि मिचकुरि का लीन उठाय।
ओहिं उठाकै जेब माँ धरिल्यौ
बुढ़उ चले डगर माँ जायँ।
थोरी देर माँ मिचकुरि बोली
देरी काहे रह्यो लगाय।
अधर चूमिल्यो मोरे प्रियतम
औ छाती ते लेहु लगाय।
ऐस करौ औ प्रियतम मोरे
अपनी सेज माँ लेहु सुलाय।
बुढ़ऊ बोले हमरे अन्दर
प्रेम करनकी शक्ति नायँ।
बात करन्ती मिचकुरि हमका
बड़े भाग ते मिलिगै भाय।
(मिचकुरी = मेढकी)
---लक्ष्मीनारायण गुप्त
---११ मई २०१०